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Dharam / धर्मशास्त्र / सम्प्रदाय
1) वेद – ब्रह्म द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से दिया गया ज्ञान
2) उपनिषद- वेदो की व्याख्या ज्ञानकाण्ड द्वारा
3) रामायण / श्री रामचरित मानस
सम्प्रदाय
पारिवारिक परम्परा, क्षेत्रीय रिवाज, संगत (मित्रगण) का प्रभाव एवं व्यक्तिगत रुचि के आधार पर मिल- 2 इष्ट को मानने वाला समूह सम्प्रदाय कहलाता है। जैसे कि वेवजन सम्प्रदाय, शेव, बौद्ध, जैन, ईसाई, मुस्लिम तथा यहूदी आदि पंच सम्प्रदाय कहलाते हैं। प्रत्येक सम्प्रदाया का अपना अलग इष्ट, अलग शास्त्र व अलग-2 नियम व सिद्धान्त होते है।
सम्प्रदाय शास्त्र
1) हिन्दू धर्म में पुराण इत्यादि ।
2) मुस्लिम में क़ुरान |
3) ईसाइयों में बाइवल इत्यादि ।
4) उप सम्प्रदाय मनो धर्म गुरुपंच इत्यादि
इसके अन्तर्गत मनमाने तरीके से (प्रामाणिक शास्त्रो के विरुद्ध) अपने नियमो का प्रचार-प्रसार करना, मनमाने ढंग से इष्ट की रचना करना तथा अपनी कल्पना के आधार पर शास्त्र की रचना करना शामिल है।
इन्हें PSEUDO-RELUSION भी कहा जाता है। वास्तव में, ये धार्मिक संस्थाओं की अपेक्षा सामाजिक संस्थाये अधिक होती है। जैसे कि ब्रह्मकुमारी, राच्या स्वामी निरंकारी कबीर पंथी साईबाबा, इत्यादि इन संस्थाओं में ब्रह्म परमात्मा गौण होता है।